संदेश

#DivinePlay_Of_GodKabir

चित्र
पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी द्वारा किये गए चमत्कारों की कुछ झलकियां। कबीर साहेब द्वारा सर्वानंद को शरण में लेना पंडित सर्वानंद ने अपनी माँ से कहा कि मैंने सभी ऋषियों को शास्त्रार्थ में हरा दिया है तो मेरा नाम सर्वाजीत रख दो लेकिन उनकी माँ ने सर्वानंद से कहा कि पहले आप कबीर साहेब को शास्त्रार्थ में हरा दो तब आपका नाम सर्वाजीत रख दिया जाएगा। जब सर्वानंद कबीर साहेब के पास शास्त्रार्थ करने पहुँचे तो कबीर साहेब ने कहा कि आप तो वेद-शास्त्रों के ज्ञाता हैं मैं आपसे शास्त्रार्थ नहीं कर सकता। तब सर्वानंद ने एक पत्र लिखा कि शास्त्रार्थ में सर्वानंद जीते और कबीर जी हार गए। उस पर कबीर साहेब जी से अंगूठा लगवा लिया। लेकिन जैसे ही सर्वानंद अपनी माँ के पास जाते तो अक्षर बदल कर कबीर जी जीते और पंडित सर्वानंद हार गए ये हो जाते। ये देखकर सर्वानंद आश्चर्य चकित हो गए और आखिर में हार मानकर सर्वानंद ने कबीर साहेब की शरण ग्रहण की। 🔅सम्मन को पार करना सम्मन बहुत गरीब था। जब कबीर परमात्मा का भक्त बना। तब परमात्मा के आशीर्वाद से दिल्ली का महान धनी व्यक्ति हो गया, परंतु मोक्ष की इच्छा नहीं बनी। सम्मान ने अपने पर...

#GodKabir_Comes_In_4_Yugas

चित्र
कबीर परमात्मा चारों युगों में आते हैं यजुर्वेद के अध्याय नं. 29 के श्लोक नं. 25 (संत रामपाल जी महाराज द्वारा भाषा-भाष्य):- जिस समय पूर्ण परमात्मा प्रकट होता है उस समय सर्व ऋषि व सन्त जन शास्त्र विधि त्याग कर मनमाना आचरण अर्थात् पूजा कर रहे होते हैं। तब अपने तत्वज्ञान का संदेशवाहक बन कर स्वयं ही कबीर प्रभु ही आता है। अवश्य देखिए- साधना चैनल प्रतिदिन 7:30 PM से! ईश्वर TV प्रतिदिन 8:30 PM से!

सामाजिक सुधार

चित्र
सामाजिक बदलाव   संत रामपाल जी महाराज के द्वारा दिए गए सत्यज्ञान से एक स्वस्थ मानव समाज तैयार हो रहा है । एक ऐसा मानव समाज जो चोरी , रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार, नशा, दहेज आदी कुरुतियां जो मानव समाज के पतन का कारण है , उनसे मुक्त हो । संत रामपाल जी महाराज ने एक ऐसा समाज स्थापित किया है जिसमे बहन बेटियां सुरक्षित है ।   संत रामपाल जी महाराज बताते है कि -       पर नारी को  देखीये बहन ,बेटी के भाव ।       कह कबीर काम नाश का यही सहज उपाव ।  संट रामपाल  जी महाराज के आदेशानुसार  उनके शिष्य  दहेज मुक्त शादी   (रमैनी)   कार्ययक्रम से लाखों बेटीयो का दहेज रूपी राक्षस से मुक्त करके उनका जीवन स्वर्ग बनाया है ।    अवश्य देखिए- साधना चैनल प्रतिदिन 7:30 PM से! ईश्वर TV प्रतिदिन 8:30 PM से!

भारत पुनरुत्थान

चित्र
भारत - विश्वगुरु     प्राचीन काल से ही भारत विश्व गुरु रहा है क्योंकि इस पावन धरती  को अनेक  ऋषि, मुनियों व् संतो ने इसे इसे अपने तप से संजोया  है ।  भारत की सभ्यता संस्कृति पुरे विश्व से अलग व अनुपम रही जिस कारण भारत को विश्वगुरु माना जाता था । भारत ही एक ऐसा देश है जहां धर्म ,रीती रिवाज आदी को प्रधानता दी गयी है । भारत के लोग धर्म और अपने पवित्र शास्त्रों को ही आधार मानकर ही भगवान में आस्था रखते थे ।  वर्तमान समय में भारत की यह छवि धूमिल हो गयी है भारत गरीबी ,अशिक्षा ,बेरोजगारी जैसी समस्यायों से झूझ रहा है । इसका कारण यह भी हो सकता है कि भारत में जिन  धार्मिक शक्तियों का प्रभाव रहा है वह पूर्णत नष्ट हो चूका है परिणामस्वरूप मानव समाज नास्तिकता की और अग्रसर हो रहा है ।   परन्तु सभी भविष्यवक्ताओ ने एक भविष्य वाणियां की है कि भारत फिर से विश्व गुरु बनेगा ।     जानने के लिए क्लिक कीजिये  कुछ भवियवाणियां 👇 👉 नास्त्रेदमस ने कहा था स्वतंत्रता के चार वर्ष बाद 1951 में भारत में एक महान संत का जन्म होगा जो विश्व को नए ज्ञान से पर...

सत्यभक्ति से रोगमुक्ति

चित्र
सत्भक्ति से आई खुशियां मानव जीवन एक ऐसा सफर कोई न कोई बीमारी दुःख तकलीफ लगी ही रहती है । इसी दौरान मनुष्य कई ऐसी बिमारियों से ग्रसित हो जाता है जिससे उसे आजीवन झूझना पड़ता है ।   जैसे - केन्सर , एड्स आदी। इसका कारण यदि आध्यात्मिक ज्ञान से देखा जाये तो जब मनुष्य के पुण्य कर्मों की कमाई समाप्त होने लगती है और उसके पापा कर्मो का दबाव बढ़ने लगता है तो कर्मानुसार वह दुःख , तकलीफों और रोग से ग्रसित हो जाता है जिसका इलाज डॉक्टर भी नही कर सकते और उसे लाइलाज बीमारी मन लिया जाता है । कारण यह है कि मनुष्य के भक्ति कर्म शास्त्र आधारित न होकर मनमानी साधना होती है जिससे मनुष्य को कोई लाभ नही होता है । आइये जानते है कि हमारे पवित्र शास्त्रों में आखिर कोनसी  सद्भगति  बताई गई है । जिससे मानव इस लोक में सुखी होने के साथ साथ मोक्ष को प्राप्त कर सकता है 👇   👉ऋग्वेद मंडल 10 सूक्त 169 मंत्र 2 में स्पष्ट है कि यदि रोगी की जीवन शक्ति नष्ट हो गई हो और रोगी मृत्यु के समीप पहुंच गया हो तो भी परमात्मा उसको सही करके सौ वर्ष की आयु प्रदान करता है। 👉यजुर्वेद अध्याय 8 मन्त्र 13 में कहा गया है...

Geeta Gyaan

चित्र
  गीता ज्ञान पवित्र श्री मदभगवद गीता के ज्ञान को जानेंगे । श्रीमद्भगवत गीता अध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि ‘अर्जुन मैं बढ़ा हुआ काल हूँ। अब सर्व लोकों को खाने के लिए प्रकट हुआ हूँ।‘  ♦️पवित्र गीता जी के ज्ञान को यदि श्री कृष्ण जी बोल रहे होते तो यह नहीं कहते कि अब प्रकट हुआ हूँ।  ♦️श्री कृष्ण जी काल नहीं थे, उनके दर्शन मात्र से मनुष्य, पशु (गाय आदि) प्रसन्न होकर श्री कृष्ण जी के पास आकर प्यार पाते थे। ♦️काल कोई और शक्ति है। वह श्री कृष्ण जी के शरीर में प्रेतवत प्रवेश करके पवित्र श्रीमद्भगवत गीता जी के ज्ञान रूप में चारों पवित्र वेदों का सार बोल गया।  ♦️काल की एक हजार भुजाऐं हैं। श्री कृष्ण जी श्री विष्णु जी के अवतार थे, जिनकी चार भुजाऐं हैं।  ♦️अध्याय 11 श्लोक 21 व 46 में अर्जुन कह रहा है कि भगवन् ! आप तो ऋषियों, देवताओं तथा सिद्धों को भी खा रहे हो, जो आप का ही गुणगान कर रहे हैं। हे सहस्त्राबाहु अर्थात् हजार भुजा वाले भगवान ! आप अपने उसी चतुर्भुज रूप में आईये। मैं आपके विकराल रूप को देखकर धीरज नहीं कर पा रहा हूँ। ♦️अध्याय 11 श्ल...
चित्र
                            शिक्षा और मोक्ष  शिक्षा का प्रयोजन क्या है , मानव जीवन के मूल उद्देश्य से शिक्षा का क्या सम्बन्ध है । प्राचीन भारत की शिक्षा धर्म पर आधारित थी । शिक्षा का परम् उद्देश्य धर्माचरण की प्रवर्ति जाग्रत करने रहा है ।    परन्तु वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप एकदम से बदल गया है जिसका उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्ति तथा अधिक से अधिक माया संग्रह रह गया है । जिसमे व्यक्ति के मूल उद्देश्य का मार्ग अवरुद्ध किया है । मानव जीवन का     मूल उद्देश्य  👉         सभी संतो और सदग्रन्थों के अनुुसार मनुष्य जीवन का मुख्य उद्देश्य भक्ति कर मोक्ष पाना है इसलिए परमात्मा ने कलियुग में मानव को शिक्षा दी और अक्षर ज्ञान से परिचित कराया ताकि ये अपने सदग्रन्थों को स्वयं पढ़कर सत्य भक्ति का निर्णय कर सके, पर मानव उच्च शिक्षा प्राप्त करके अहंकारी बन गया और परमात्मा भूल गया। उच्च शिक्षा भक्ति मार्ग में बाधक है क्योंकि ज्यादा शिक्षित व्यक्ति में अहंकार आता...