शिक्षा और मोक्ष
शिक्षा का प्रयोजन क्या है , मानव जीवन के मूल उद्देश्य से शिक्षा का क्या सम्बन्ध है । प्राचीन भारत की शिक्षा धर्म पर आधारित थी । शिक्षा का परम् उद्देश्य धर्माचरण की प्रवर्ति जाग्रत करने रहा है ।
परन्तु वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप एकदम से बदल गया है जिसका उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्ति तथा अधिक से अधिक माया संग्रह रह गया है ।
जिसमे व्यक्ति के मूल उद्देश्य का मार्ग अवरुद्ध किया है ।
मानव जीवन का मूल उद्देश्य 👉
सभी संतो और सदग्रन्थों के अनुुसार मनुष्य जीवन का मुख्य उद्देश्य भक्ति कर मोक्ष पाना है इसलिए परमात्मा ने कलियुग में मानव को शिक्षा दी और अक्षर ज्ञान से परिचित कराया ताकि ये अपने सदग्रन्थों को स्वयं पढ़कर सत्य भक्ति का निर्णय कर सके, पर मानव उच्च शिक्षा प्राप्त करके अहंकारी बन गया और परमात्मा भूल गया। उच्च शिक्षा भक्ति मार्ग में बाधक है क्योंकि ज्यादा शिक्षित व्यक्ति में अहंकार आता है जिसकी वजह से वे भक्ति मार्ग को समझने की कोशिश नहीं करते।
भक्ति मार्ग में सबसे बड़ा दुश्मन अहंकार होता है। उच्च शिक्षा से मनुष्य में अहंकार आता है।
उच्च शिक्षा ने मानव को अहंकारी बनाया है। उच्च शिक्षा आध्यात्मिक मार्ग में हानिकारक होती है।
📖📖कबीर पढ़-पढ़ तो पत्थर भया, लिख-लिख भया तू चोर।
जिस पढ़ने से परमात्मा मिलै, वो पढ़ना कुछ ओर।।📓📓
वास्तविक शिक्षा वो है जिससे परमात्मा की प्राप्ति होती है। वर्तमान में परमात्मा प्राप्ति की वास्तविक शिक्षा संत रामपाल जी महाराज आध्यात्मिक ग्रन्थ (धर्मशास्त्रों) के अनुसार करवा रहे है।
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